Monday, 10 September 2012

ज्योतिष का जाल














एक हमारे मित्र हैं चौबे जी,
कुछ दिनों से जी रहे थे बड़े बुरे हाल में,
और कुछ उनकी समझ ना आया,
तो जा फंसे ज्योतिष के जाल में,


जाकर ज्योतिष से बोले, पंडित जी अब मैं थक गया हूँ,
इस दुखी जीवन से पक गया हूँ,
मुझे बताइए मेरा हाल इतना क्यों ख़राब हैं?
पिछले जन्म का तो नहीं कोई श्राप हैं?


पंडित जी बोले, ओह हो हो! तुम्हारा शनि तो बड़ा ही उच्च हैं,
बुद्ध, शुक्र की दशा बड़ी ही तुच्छ हैं,
राहू, केतु जा बैठे हैं आठवे घर में,
चन्द्रमा भी पहुच गया हैं पांचवे घर में,


फिर पंडित जी बोले, तेरी दशा तो बड़ी दुष्प्रभावी हैं,
इसमें तेरा सब कुछ खो सकता हैं,
लेकिन अगर तू पांच हज़ार रूपये दक्षिणा दे दे,
तो इसका कुछ उपाय ज़रूर हो सकता हैं,


इस पर चौबे जी झन्ना गए,
पंडित जी के ऊपर भन्ना गए,
बोले, शनि मेरे बेटे का नाम है वो कहा से उच्च हैं?
बुद्ध, शुक्र की दशा से मुझे क्या लेना कुछ हैं?


अरे ओ पंडित बेवक़ूफ़ ना बना, आठवे घर में तो शर्मा रहता हैं,
राहू और केतु क्या उसके किरायेदार हैं जो उन्हें वो सहता हैं?
और पंडित मैं इतना भी नहीं हूँ अनजान,
मैं जानता हूँ चन्द्रमा का निवास स्थान हैं आसमान,


अब अपनी दशा को तो लूँगा मैं खुद सुधार,
पर तेरा ना चलने दूंगा ये पाखण्ड का व्यापार,
ये कहते ही चौबे जी ने उसके सारे केश हिला दिए,
और मारते मारते उसके भूत, भविष्य और वर्त्तमान सब भुला दिए!!