कुछ दिनों से सब जगह भ्रष्टाचार के बारे में सुन रहा था,
आखिर ये हैं क्या बला, कोरी कल्पनाए बुन रहा था,
पहले तो लगा कि ये कोई नए किस्म का अचार हैं,
जिसका नया नया शुरू हुआ भारत में व्यापार हैं,
पर फिर पता चला की कोई हुआ हैं टू जी घोटाला,
जिसमे था भ्रष्टाचार का बोलबाला,
फिर कामनवेल्थ, कोल् गेट और हुए कई नए नए घोटाले युक्त काम,
इन सभी में फिर से आया भ्रष्टाचार का नाम,
अब तो मेरी जिज्ञासा और अधिक जाग चुकी थी,
अब सच्चाई थी जाननी मुझे, कल्पनाए सारी भाग चुकी थी,
तो लेकर अपने इस सवाल के जवाब की आस,
मैं जा पहुंचा एक नेता जी के पास,
बोला, नेता जी, इस सवाल के जवाब के लिए कई जगह मैंने धक्के खा लिए,
अब आप ही इस विषय पर थोड़ा प्रकाश डालिए,
नेता जी बोले, सरल शब्दों में कहूँ तो भ्रष्टाचार राजनीति का शिष्टाचार हैं,
एक नियमावली हैं जिसके आधार पर चलता अपना व्यापार हैं,
जो पैसा जनता के हित्त के लिए हमें मिलता हैं,
अपने घर का खर्चा भी उसी से चलता हैं,
अब मेरी समझ में पूरी तरह आ चुका था भ्रष्टाचार का खेल,
समझ चुका था ये नेता लोग रहे हैं अपना ही पैसा पेल
पर समय कहाँ था की करूँ भ्रष्टाचारियों से दो-दो हाथ,
तो मैं भी शामिल हो गया उस भीड़ में, जो कहती थी, "अन्ना तुम संघर्ष करो, हम हैं तुम्हारे साथ"

